बौद्घिक संघ, भारत एक स्वैच्छिक सामाजिक बुद्धि जीवियों का संगठन है । इसके अंतर्गत " घरेलू पुस्तकालय योजना " संचालित है । बौद्घिक संघ, भारत केवल प्रेरणा देने का कार्यक्रम चलाता है जिससे लोग अपने घर, परिवार को ग्यान के प्रकाश से आलोकित कर दें । विभिन्न परिवार तरह तरह के कर्मकांडों, रीतिरिवाजों में उलझ कर बौद्धिक उन्नति से दूर हो जाते हैं जब कि जब कभी वे स्वयं स्कूल, कालेज गये थे तो इन्हीं पुस्तकों के सहारे बढ़े थे । लेखनी थाम कर, कलम पकड़ कर ग्यान के प्रकाश को देखा था, पर सब भूल गये रोजी रोटी और कर्मकांडों के चक्कर में ।
बौद्घिक संघ, भारत यह कभी नहीं कहता कि सारे कर्मकांड बेकार हैं, नहीं करने चाहिये । हां यह जरूर कहता है कि आस्था के नाम पर कुछ भी, कभी भी करने के पहले वैग्यानिक दृष्टि से भी समझें , तब करें । अनावश्यक समय न बरबाद करें । जिस कलम ने आपको शिक्षा दी, लिखना सिखाया उसको भुला कर न जाने किसकी किसकी पूजा करने लगे, आराधना करने लगे, वन्दना करने लगे । देवी देवताओं का क्या योगदान रहा? चिन्तन करें तो सही । यह आपकी मान्यताएँ भर हैं । सनातनी धर्म, बुद्ध, जैन, इस्लाम, ईसाई, सिख सब अलग अलग पूजा पद्धतियों में लगे हैं लेकिन कोई भी धर्म, सम्प्रदाय हो सबकी कलम एक है लेखनी एक है । तो पूजा ही करनी है, वन्दना ही करनी है तो लेखनी की करिये, कलम की करिये । पुस्तकों को घर में सजायिये, पढ़िये । ग्यान लीजिये, दीजिये । "घरेलू पुस्तकालय " बनाइये ।
क्या करना है जरा सा यह भी समझ लें । जैसे लेखक, कवि के घर में पुस्तकें जरूर होती हैं वैसे ही आप अपने शयन कक्ष, बैठक कक्ष या ड्राइंग रूम में कम से कम एक अलमारी और रैक में कुछ पुस्तकें, पत्रिकायें, समाचार पत्र, यदि हो सके टैबलेट, आईपैड, लैपटॉप, कम्प्यूटर जरूर रखें । एक कलम दान कुछ कलमें रखें और कुछ सादे कागज, रजिस्टर आदि लिखने के लिये । यहां 24 घंटे में कम से कम एक घंटे बैठ कर चिन्तन, पठन, लेखन आदि करें । यही सबसे बड़ी साधना है, उपासना है । फिर भी आप पूजा पाठ करने वाले हैं और बिना उसके अधूरा सा लगता है तो इन पुस्तकों को प्रतिदिन एक दीपक दिखा दें, जला दें, अगर बत्ती जला दें । लेखनी की वन्दना कर दें ।
ग्यान कांड और कर्मकांड दोनो से गये साथ ही भक्ति कांड भी । घर घर पुस्तकालय से बौद्घिक प्रगति तेजी से होगी । नई नई पुस्तकें लिखी जांयेगी, पढ़ी जांयेगी । पुस्तक क्रांति होगी । देश को ग्यान के उच्च शिखर पर ले जाना है तो बौद्धिक संघ, भारत की घरेलू पुस्तकालय योजना को अपनाना है ।
प्रत्येक व्यक्ति अपनी अपनी रुचि के अनुसार, जरूरत के अनुसार पुस्तकें, पत्रिकायें रख सकता है । समय समय पर बदल सकता है । देखते देखते छोटा सा घरेलू पुस्तकालय आपको पाठक से लेखक बना सकता है । आपके व्यवसाय में, नौकरी में चार चांद लगा सकता है । समाज मे एक सम्मान जनक स्थान दिला सकता है । एक बौद्घिक क्रांति ला सकता है । घर घर में हुई बौद्घिक क्रांति पूरे समाज, देश में बौद्धिक क्रांति पैदा कर देगी ।
जय हिन्द! जय भारत!! जय बौद्घिक संघ !!!
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राजकुमार सचान "होरी "
राष्ट्रीय अध्यक्ष बौद्धिक संघ, भारत
Facebook /bauddhiksangh
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