जिन जातियों ,वर्गों ने पुस्तकों के लेखन में ध्यान दिया वे फारवर्ड हो गयीं और जिन्होंने ध्यान नहीं दिया वे बैकवर्ड और दलित हो गयीं / ८५ %जनसंख्या ने इतना कम ध्यान लिखने पढ़ने में दिया या कह सकते हैं कि तत्कालीन ब्राह्मण धर्म की व्यवस्था से मज़बूर थीं जिस से वे बहुत बहुत पिछड़ गयीं , यहां तक कि आज भी वे उबर नहीं सकी हैं / आज स्वतन्त्रता के ७१ वर्षों बाद भी पुस्तकों ,समाचार पत्रों ,पत्रिकाओं के प्रकाशन और न्यूज़ चैनलों में भी ये वर्ग अत्यंत पीछे हैं / बौद्धिक संघ की मान्यता है कि अगर ये पिछड़े वर्ग देश की मुख्य धारा में आ जाएँ तो देश का कई गुना बौद्धिक विकास हो जायेगा परिणाम स्वरुप राष्ट्र का समग्र विकास जरूर होगा /
आईये हम सब बौद्धिक संघ भारत के तले इस अभियान को सफल बनाएं /
राज कुमार सचान होरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
बौद्धिक संघ ,भारत
www.bauddhiksangh.com
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