वंचित समाज धार्मिक कर्मकांडों और रीति रिवाजों में उलझ कर पीढ़ी दर पीढ़ी मूर्ति पूजा, देवी देवताओं में भटक कर शिक्षा और ग्यान से वंचित होता गया । शैक्षिक और बौद्घिक क्षेत्रों में पिछड़ जाने के कारण राजनैतिक, आर्थिक ,सामाजिक क्षेत्रों मे भी पिछड़ते रहे ।
केवल ब्राह्मणवाद को दोष दे कर हाथ झाड़ लेने का कार्य बन्द होना चाहिए । निर्माण बौद्घिक संघ का नारा है । वंचितों को जितनी देवालयों की जरूरत नहीं उससे अधिक जरूरत है --- शिक्षालयों और पुस्तकालयों की ।
आइये अपने अपने घर मे बैठक कक्ष मे एक अलमारी और रैक मे पुस्तकें रखना आरम्भ करें । जो भी जरूरी, जागरूक करने वाली पुस्तकें हों उनसे शुरुआत करें । धीरे धीरे अन्य पुस्तकें बढ़ायें । पत्रिकायें भी मंगायें । मोहल्ले या गांव में कम से कम एक छोटा ही सही सार्वजनिक पुस्तकालय और वाचनालय भी बनायें ।
प्रत्येक दिन प्रात: और सायं इसी कक्ष में लेखनी की वन्दना अवश्य करें और परिवार में ऐसा करने को प्रोत्साहित करें । समाज मे एक नयी क्रांति आने लगेगी । लेखनी के सामने पाखंड टिक नहीं सकते। पिछड़ापन टिक नहीं सकता । समाज में वातावरण बनेगा तो पत्रकार, लेखक, कवि, बुद्धि जीवी, कलाकार पैदा होंगे । सदियों की बीमारी दूर होगी । बौद्घिक सत्ता में आगे आ कर राष्ट्र की मुख्य धारा में आ जायेंगे ।हम सब अपने अपने स्तर पर इस योजना को आगे बढ़ा कर अपना योगदान दे सकते हैं ।
बौद्घिक संघ --- जिन्दाबाद
राजकुमार सचान होरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, बौद्घिक संघ, भारत
www.bauddhiksangh.com
बेहतरीन सुझाव असहमत होने की गुंजाइश ही नहीं. "लेखनी की वन्दना...." यदि यह प्रतीकात्मक है तो सही. वरना....
ReplyDeleteप्रतीकात्मक
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