बौद्धिक क्रांति - राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक क्रांतियों की जननी है
राजकुमार सचान होरी
फिर उठाइये कलम और चलाइये तलवार से भी तेज । बदलिये इतिहास । हल की मुठिया अब औरों को पकड़ने दीजिये । आप पकड़िये कलम ।
" बौद्धिक संघ, भारत "
राजकुमार सचान होरी
फिर उठाइये कलम और चलाइये तलवार से भी तेज । बदलिये इतिहास । हल की मुठिया अब औरों को पकड़ने दीजिये । आप पकड़िये कलम ।
" बौद्धिक संघ, भारत "
A must for society
ReplyDelete